'"जनहित की योजनाओं मे १ रुप्ये मे से मात्र १० पैसे ही पहुचते है " की स्वीकारोक्ति पर स्वर्गीय राजीवगाँधी को सत-सत नमन |काश राहुल गाँधी भी इस बात को समझ पाते | यही ९० पैसे से राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों की संपत्ति २ /३ सालो मे २०० -३०० % और किसी -किसी की १००% हो जाती है |यही भ्रस्टाचार ही देश के विकास मे बाधक है ,गरीबी और अपराध का कारण है |
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